Laxmii Bomb Full Movie Review in Hindi

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Introduction

Laxmii फिल्म को फॉक्स स्टार स्टूडियोज, शबीना एंटरटेनमेंट और तुषार एंटरटेनमेंट ने डिज्नी प्लस हॉटस्टार पर 09 नवंबर 2020 को रिलीज़ किया है। इस फिल्म को आप अपनी पूरी फैमिली के साथ मिलकर देख सकते हो क्योंकि इसमें कोई भी अश्लील दृश्य नहीं है। Laxmii फिल्म के निर्देशक है राघवा लॉरेंस और फिल्म के निर्माता है शबीना खान और तुषार कपूर। इस फिल्म में मुख्य नायक अक्षय कुमार, किआरा अडवाणी, शरद केलकर, मुस्कान खूबचंदनी, अश्विनी कालसेकर, राजेश शर्मा और आयेशा राजा मिश्रा हैं। Laxmii फिल्म का कुल समय 2:21 मिनट हैं।

Story

Laxmii फिल्म एक भारतीय कॉमेडी हॉरर और एडवेंचर से भरी फिल्म है। पहले इस फिल्म को 22 मई 2020 को रिलीज़ करना था लेकिन कोविड 19 सर्वव्यापी महामारी के कारन इसकी तारीख आगे बड़ा दी गई और इसको सिनेमा घरो की वजाये डिज्नी प्लस हॉटस्टार पर रिलीज़ करना पड़ा। Laxmii फिल्म 2011 में आई तामील फिल्म कंचना का पुनर्निर्माण है। इस फिल्म में आसिफ (Akshay Kumar) भूतो में विश्वास नहीं करता और लोगो को भी विश्वास न करने के लिए जाग्रुत करता है लेकिन आसिफ जब अपने ससुराल वालो को मिलने जाता है तोह वो खुद वहां पर एक आत्मा में परिवर्तन हो जाता है। इसके बाद आसिफ कैसे उस आत्मा से अपना पीछा छुड़वाता है उसके लिए आपको Laxmii फिल्म की समीक्षा पड़नी होगी।

Review

Laxmii फिल्म की कहानी शुरू होती है पलक (Muskan Khubchandni) से जो अपनी गर्भवती बहन के साथ रहती है और उनके घर के साथ एक ऐसा प्लाट होता है जिसके बारे में बहुत डरावनी अफवाहे फैली हुई है के वहां पर भूत रहते है। एक दिन पलक अपने सूखे हुए कपडे उतारने के लिए छत पर जाती है तोह तेज़ हवा के कारन उसका एक दुप्पट्टा उड़ कर उस प्लाट में जा गिरता है और पलक उस दुप्पट्टे को उठा लाती है। उसके बाद रात को पलक को बहुत डरावने सपने आने लगते है जिसके बाद वो बहुत डर जाती है और उसके बाद पलक की बहन पलक को उस दुप्पट्टे को वापिस उसी प्लाट में फेंकने को कहती है जिसके बाद वो चुड़ैल वापिस अपने प्लाट में चली जाती है। इसके बाद एक पाखंडी बाबा लोगो से पैसे निकालने के लिए एक लड़की के अंदर भूत होने का दावा करता है लेकिन उसी समय वहां पर आसिफ (Akshay Kumar) आ जाता है और वो उस पाखंडी बाबे का राज सभी लोगो के सामने खोल देता है और उस बाबे को चेतावनी देकर छोड़ देता है। फिर आसिफ अपने घर जाता है यहाँ पर उसकी पत्नी रश्मि (Kiara Advani) आसिफ का इंतज़ार कर रही होती है क्यों के आज उनकी विवाह की वर्षगांठ होती है। आसिफ और रश्मि के साथ आसिफ के भाई का बेटा शान भी रहता है जिसके माँ बाप की किसी दुर्घटना में मौत हो गई होती है।

उसके बाद रश्मि को उसकी माँ (Ayesha Raza Mishra) का फ़ोन आता है जो उनको अपनी 25वी शादी की सालगिरा पर वापिस अपने घर मिलने के लिए बुलाती है। रश्मि शादी के बाद अपने माँ बाप से दूर हो गई थी क्योंकि रश्मि ने एक मुस्लिम लड़के के साथ शादी कर ली होती है जो उसके पिता को बिलकुल भी पसंद नहीं है। इस लिए रश्मि और आसिफ उनसे मिलने के लिए राज़ी हो जाते है और अगले ही दिन आसिफ, रश्मि और शान उनसे मिलने के लिए चले जाते है। आसिफ के ससुराल में रश्मि के माँ बाप के इलावा रश्मि का एक भाई (Manu Rishi Chadha) भी है जिसकी एक पत्नी अश्विनी (Ashwini Kalsekar) और एक बेटी भी है। आसिफ को रश्मि के सभी घर वाले अपना लेते हैं लेकिन उनका बाप अभी भी उन दोनों से नराज़ है जो उनको माफ़ नहीं करना चाहता। फिर एक दिन गली के सभी बच्चे क्रिकेट खेलने के लिए इकठे हो जाते है पर आस पास में कोई भी खेल का मैदान न होने की वजह से आसिफ सभी बच्चो को उसी प्लाट में खेलने के लिए लेजाता है यहाँ पर वो आत्माएं रहती है। आसिफ उस जगह पर बच्चो से साफ़ सफाई करवाने के बाद विकेट जमीन में गाड़ने लगता है तोह वो निचे दभी हुई लाश के हाथ में गुस्स जाती है और उसके बाद अचानक से मौसम भी बदल जाता है तेज़ हवा और बारिश आ जाती है, जिसके बाद सभी बच्चे डर के अपने अपने घर को भाग जाते हैं और आसिफ भी अपनी विकेट निकाल के अपने घर वापिस आ जाता है और उसकी विक्टो को निचे खून लग जाता है लेकिन आसिफ ऐसे ही उनको अपने बैग में डालकर लेजाता है।

जैसे ही आसिफ घर पहुँचता है तोह सभी घर वालो को एक गन्दी सी बदबू आने लगती है जो उस विकेट पर लगे खून की वजह से आ रही होती है और आसिफ उनको अपने घर के सामने घास पर दो देता है और उसके बाद वो घास काला होने लगता है। उसी रात रश्मि की माँ को किसी की रोने की आवाज़े सुनाई देती है जिसके बाद उसकी माँ निचे देखने जाती है और निचे उनको एक आत्मा दिखाई देती है जिसकी वजह से वो डर के वापिस अपने कमरे में आकर अपने बिस्तर के निचे शिप जाती है। दूसरी सुबह रश्मि की माँ अपने घर वालों को उस चुड़ैल के बारे में बताती है लेकिन कोई भी उन की बात पर विश्वास नहीं करता। दूसरी रात मनु को भी एक आत्मा दिखाई देती है जिसके बाद अगली सुबह मनु, अश्विनी और उनकी माँ एक पुजारी के पास जाते है उस आत्मा का कोई उपाय करने के लिए और पुजारी उनको एक बड़ी पूजा करवाने को कहता है, जिसके बाद ही पता चलेगा के घर में क्या है और पुजारी उनको तीन पड़ाव से गुजरने को कहता है जिसके बाद पूरी तरह से पता चल जायेगा के आखिर वो आत्मा चाहती क्या है और यह सब कुछ उनको तब करना होगा जब पूरा घर खाली हो। मोहल्ले में माता का जगराता आ जाता है और सभी घर वाले उस जगराते में चले जाते है और अश्विनी और उसकी सास वो तीनो पड़ाव पूरे कर लेते है जिसके बाद उनको पता चलता है के वो आत्मा किसी के खून की प्यासी है।

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अगली सुबह आसिफ किसी तरह से अपने ससुर से माफ़ी मांग लेता है और उनको मना लेता है और उनको प्रभावित करने के लिए उनके लिए घास वाली चाय बना कर लाता है, आसिफ चाय में वही घास डालता है जिसके ऊपर खून लगा होता है। पर आसिफ का ससुर चाय पिने से मना कर देता है क्योंकि आसिफ ने उसमे चिन्नी डाल दी होती है और आसिफ के ससुर को शुगर होती है, जिसके बाद आसिफ उस चाय को खुद ही पी लेता है और वो आत्मा आसिफ के अंदर गुस्स जाती है। अगली सुबह अश्विनी और उसकी सास माँ उस पुजारी के पास वापिस जाती है और वो पुजारी उनकी मदद करने के लिए मना कर देता है क्यों के वो आत्मा बहुत शक्तिशाली होती है और पुजारी के पास उसको काबू करने का कोई उपाए नहीं होता। जिसके बाद माँ किसी शाहनवाज़ पीर बाबा को फ़ोन करती है मदद के लिए लेकिन वो भी कही बाहर गया होता है और उसने दो दिन बाद वापिस आना होता है। फिर सभी घर वाले शादी की सालगिरा की खरीदारी करने एक साडी की दूकान में जाते है यहाँ पर आसिफ साडी पहन कर औरतो की तरह बहवार करने लगता है जिससे परेशान हो कर उसका ससुर आसिफ के एक थपड लगा देता है लेकिन आसिफ भी उनके बराबर थपड मार देता है और उसके बाद आसिफ वहां से चला जाता है। रात को अश्विनी को कुछ आवाज़े सुनाई देती है जिसको देखने वो अपनी छत पर जाती है और देखती है के आसिफ अपने हाथो में चुडिया पहन कर उनको चुम रहा होता है, जिसके बाद अश्विनी आसिफ के बारे में रश्मि को बताने जाती है और वहां पर देखती है के आसिफ अपने कमरे में सोया होता है।

दूसरी और आसिफ MLA गिरजा (Tarun Arora) के दोनों बेटों को जान से मार देता है। और वापिस आसिफ अपने घर आता है और घर वालो को अपने बारे में बता देता है के मेरे अंदर एक आत्मा है और किसी ने भी मेरे खिलाफ कोई भी साजिश की तोह वो उसको जान से मार देगा। अगली सुबह सभी घर वाले आसिफ को शाहनवाज़ पीर बाबा के पास लेजाते है और बाबा किसी तरह से आसिफ के अंदर से आत्मा को निकाल देता है और उनके घर जाकर पूरी तरह से उस आत्मा से पीछा छुड़वाने के लिए नवाज़ पड़ने लगते है, लेकिन वो आत्मा बाबा के सभी चेलों को डरा कर वहां से बगा देती है और शाहनवाज़ अकेले ही उस आत्मा को आसिफ के शरीर से बाहर निकाल देता है और उस आत्मा से पूछता है के तुम यहाँ पर क्यों आई हो और क्या चाहती हो। तोह वो आत्मा Laxmii (Sharad Kelkar) बताती है के उसको बचपन में उसके पिता ने घर से निकाल दिया था क्योंकि वो एक किंनर था और उसके बाद उसको अब्दुल चाचा ने पास पोल के बड़ा किया था, जिसका एक बौद्धिक रूप से अक्षम पुत्र भी था। उसके बाद वह गीता नाम की एक अन्य किन्नर युवा को गोद लेती है और गीता को डॉक्टर बनाने के लिए बहुत मेहनत करती। पलक के अब्रॉड में पढ़ाई के लिए जाने पर Laxmii ने एक ज़मीन का प्लाट ख़रीदा था ता जो गरीबो के लिए एक हस्पताल बना सके और उस प्लाट को MLA गिरजा दोखे से Laxmii से शीन लेता है और Laxmii और अब्दुल चाचा को जान से मार देता है, साथ में उसके बौद्धिक रूप से अक्षम पुत्र को भी मार देता है। इसके बाद MLA उन तीनो की लाश को उसी के खरीदी हुई जमीन में दफना देता है और मरने से पहले Laxmii ने MLA से अपना बदला लेने की कसम खाई थी।

पूरी कहानी सुनने के बाद शाहनवाज़ बाबा उस आत्मा को एक बोतल में बंद करके समुन्दर में फेक देता है। आसिफ महसूस करता है के Laxmii के साथ नाइंसाफी हुई है और वो एक बार फिर से Laxmii को अपने शरीर में आने की आज्ञा देता है। पूजा वाले दिन MLA अपने परिवार के साथ समुन्दर के पास जल रही अग्नि में लक्समी और उसके अब्दुल चाचा के शरीर को जलाने के लिए वहां पर पहुंचते हैं। तोह उसी समय Laxmii भी वहां पर आ जाती है और MLA और उसकी पत्नी को जान से मार देती है, इस तरह से Laxmii अपना बदला ले लेती है और कुछ साल के बाद के बाद आसिफ उसी ज़मीन पर एक एक Laxmii के नाम पर एक हस्पताल बना देता है। लेकिन आखिर में हमें ये संकेत दिया गया है के इस फिल्म का दूसरा भाग भी आएगा और यहाँ पर फिल्म की समाप्ति हो जाती है। ये थी Laxmii फिल्म की समीक्षा और आप मुझे कमेंट कर के बता सकते हैं के आप को मेरी Laxmii फिल्म की समीक्षा कैसी लगी।

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