Kaagaz Full Movie Review in the Hindi Language

Kaagaz-Full-Movie-Review-in-Hindi-Language

Introduction

Kaagaz (पेपर) फिल्म को भारत में सलमान खान फिल्म्स और दी सतीश कौशिक एंटरटेनमेंट प्रोडक्शन ने 07 जनुअरी 2021 को ज़ी 5 प्लेटफॉर्म पर रिलीज़ किया है। Kaagaz फिल्म के निर्देशक है सतीश कौशिक और फिल्म के निर्माता है सलमान खान, निशांत कौशिक और विकास मालू। Kaagaz फिल्म में मुख्य नायक हैं पंकज त्रिपाठी, मोनाल गज्जर, अमर उपाध्याय, टीना आहूजा और लंकेश भरद्वाज। इस फिल्म का कुल रनिंग टाइम 109 मिनट का है और Kaagaz फिल्म को आप अपने पुरे परिवार के साथ देख सकते हो क्योंकि इसमें कोई भी अश्लील दृशय नहीं है।

Story

Kaagaz फिल्म एक भारतीय जीवनी, नाटक और हास्य वाली फिल्म है। Kaagaz फिल्म की कहानी एक किसान लाल बिहारी (जिसका अभिनय पंकज त्रिपाठी ने निभाया है) की वास्तविक जीवन की कहानी पर आधारित है जिसको सरकार के रिकॉर्ड द्वारा मृत घोषित कर दिया गया है और वह अपने अस्तित्व को बचाने के लिए बहुत संगर्ष करता है। तोह कैसे लाल बिहारी अपने अस्तित्व को बचा पाता है और उसको कौन कौन सी मुसीबतो का सामना करना पड़ता है, यह सभ जानने के लिए आपको Kaagaz फिल्म की समीक्षा पड़नी होगी।

Review

Kaagaz फिल्म की कहानी शुरू होती है सन 1977 में उत्तर प्रदेश के एक छोटे से अमिलो गाँव से यहाँ पर एक आम आदमी भरत लाल बिहारी अपने घर को चलाने के लिए बैंड बाजा बजाने का काम करता है। भरत की एक छोटी सी दुकान भी है जिसमे उसको और उसकी पार्टी को अभ्यास करने में बहुत परेशानी होती थी जिसके बाद लाल बिहारी की पत्नी रुक्मणि (मोनाल गज्जर) उसको बैंक से कर्ज़ा लेकर दुकान को बड़ा करने को कहती है। अगले दिन भरत अपनी पत्नी की बात को मान कर बैंक वालो के पास कर्ज़ा लेने के लिए चला जाता है और बैंक वाले उसको कर्ज़ा देने के लिए मान जाते है लेकिन उसके लिए भरत को बैंक के पास कुछ गिरवी रखना होगा। भरत के पास अपना कुछ भी नहीं होता सिवाए उसके कुछ पुश्तैनी ज़मीन के जिसमे उसके चाचा चाची का हिस्सा होता होता है। जिसके बाद भरत अपने चाची के पास ज़मीन के कागज़ की नक़ल निकलवाने के लिए उनके पास चला जाता है।

वहां जाने के बाद भरत अपनी चाची के कहने पर जब दफ्तर में जा के ज़मीन की नक़ल निकलवाता है तोह उसमे लिखा होता है के भरत लाल बिहारी की मौत हो गई है और उसके हिस्से की ज़मीन उसके दोनों चचेरे भाईयों में बांट दी गई है। इसके बाद भरत भाग कर वापिस अपने चाचा चाची के पास आता है और वह भरत को बताते हैं के यह सभ उन्होंने उस ज़मीन को अपने बेटों के नाम करवाने के लिए किया था। इस सभ के बाद वह भरत को डरा दमका कर अपने घर से भगा देते हैं। घर वापिस आने पर भरत यह बात सभ को बता देता है जिसके बाद सारा गांव उसके पास अफ़सोस करने के लिए इकठा हो जाता है के भरत कागज़ो में मृतक है और गांव वाले उसको तरह तरह के उपाय बताने लगता है। इसके बाद भरत को गांव के सभी लोग परेशान करने लग जाते हैं यहाँ तक के बच्चे भी उसे भूत भूत कह कर बुलाने लगते हैं। इस सभ से परेशान होकर भरत अपनी समस्या को सुलझाने के लिए गांव के सरपंच के पास मदद मांगने के लिए पहुँचता है। गांव के सरपंच को भरत एक समागम में मिलता है यहाँ पर सरपंच दारु के नशे में यह कहता है के कल को वो उसे एक कागज़ पर लिख कर दे देगा के भरत अभी जिन्दा है जिसके बाद भरत ख़ुशी ख़ुशी अपने घर चला जाता है।

अगली सुबह भरत सरपंच के पास जाता है वो जिन्दा होने का प्रमाण पत्र लेने के लिए लेकिन सरपंच भरत को वो प्रमाण पत्र देने के लिए साफ़ मना कर देता है। सरपंच के मना करने के बाद भरत ने उससे मदद मांगी जिसे हम सब सिस्टम कहते हैं और फिर सिलसिला शुरू हुआ अर्जियों का। भरत ने बहुत सारे मंत्रियों को चिठियाँ लिखी और ऐसे करते करते भरत के चार साल गुजर जाते हैं। दूसरी और उसकी पत्नी माँ बनने वाली होती है जिसके कारन वो भरत की ऐसी हालत देख कर बहुत परेशान होती है क्योंकि अभ उनको दो वक़त की रोटी भी बहुत मुश्किल से नसीब हो रही होती है। कुछ दिनों बाद भरत की पत्नी एक बेटी को जनम देती है और उस दिन भरत भी अपनी बेटी की कसम खा लेता है के वो अपनी बेटी का मान सामान उसको दिलवा के ही रहेगा मतलब अपने जिन्दा होने का प्रमाण पत्र ले कर ही रहेगा।

Kaagaz-Full-Movie-Review-in-Hindi-Language-2

भरत लाल अपना प्रणाम पत्र को हासिल करने के लिए न्यायालय में अपना मामला (केस) दर्ज करवाने के लिए जाता है और वहां पर उसको वकील साधु राम (सतीश कौशिक) मिलता है जो भारत कुछ ऐसे लोगो से मिलवाता है जो बहुत लम्बे समय से अपने जिन्दा होने का प्रमाण पत्र लेने के लिए न्यायालय के चक्कर काट रहे होते हैं। साधु राम, भरत को उन लोगो से इस लिए मिलवाता है क्योंकि वो नहीं चाहता के उस का पूरा जीवन कोर्ट कचेहरी के चक्कर काटते बीत जाए लेकिन भरत उस की एक नहीं सुनता और अपनी ज़िद पर अड़ा रहता है। साधु राम केस लड़ने के लिए मान जाता है और भरत ख़ुशी ख़ुशी वापिस घर चला जाता है। भरत को न्यायालय में केस लड़ते बहुत समय बीत जाता है और कोर्ट कचेहरी के खर्चे पुरे करने के लिए उसको अपनी दुकान भी बेचनी पड़ जाती है। भरत की पत्नी उसको पीछे हटने के लिए कहती है क्योंकि उससे उसकी तड़प देखि नहीं जा रही होती लेकिन भरत पिछने हटने के वजाये विधायक के पास गुहार लगाने के लिए चला जाता है। भरत विधायक की निकल रही रैली में जाकर सड़क के विच बैठ जाता है अपने हाथ में यह लेकर के “मैं जिंदा हूँ मैं भ्रष्टाचारियों के कलम का मारा हूँ”। भरत को वहां पर कोई भी नहीं देखता और उसको विधायक के आदमी उठाकर एक साइड पर कर देते हैं जिसके बाद एक पत्रकार की नज़र उस पर पड़ती है और वो पत्रकार भरत की मदद करने के लिए उसकी फोटो खींच कर अपने अख़बार के पहले पन्ने पर छाप देती है।

कुछ दिनों के बाद भरत के दिमाग में एक योयना का जनम होता है और वो अपने चचेरे भाई के बेटे सुशिल को स्कूल से अगवाह करके अपने घर ले आता है ता जो उसके घर वाले लोग उसके खिलाफ पुलिस में परचा दाखिल करवा दे जिसके बाद उसका नाम सरकारी कागज में दाखिल हो जायेगा। सुशिल को अगवाह करने के बाद भरत उसके पिता को फ़ोन करता है और उसको अपने बेटे को वापिस पाने की एक शरत रखता है के तुम मेरे खिलाफ पुलिस में परचा दाखिल करवा दो और मैं तुम्हरे बेटे सुशिल को सही सलामत तुमको वापिस कर दूंगा लेकिन उसकी चाची बहुत होशियार होती है और उसको भरत की इस चाल का पता चल जाता है। यह योयना के काम ना करने के कारन भरत दूसरी चाल चलता है और सुशिल की कमीज को बकरे का खून लगा कर एक कुए के पास रख देता है जिसके बाद उसके घर वालो को खबर दे देता है के उसने उसको जान से मार दिया है लेकिन यह योयना भी उसकी कामयाब नहीं हो पाती। इसके बाद भरत सुशिल को वापिस उसके घर छोड़ने जाता है तोह रास्ते में उसके चचेरे भाई उसको मारने पीटने लगते है और भरत किसी तरह वहां से अपनी जान को बचा के पुलिस के पास पहुँच जाता लेकिन पुलिस भी उसकी कोई मदद नहीं करती।

Kaagaz-Full-Movie-Review-in-Hindi-Language-3

इसके बाद भरत विधायक के घर जाता है यहाँ पर विधायक भरत को एक सलाह देती है के वो अपने नाम के पीछे मृतक शब्द को जोड़ ले ता जो कोई भी उसका नाम सुने उसको तुरंत सारा मामला समझ आ जाये। विधायक की सलाह मान कर भरत अपना नाम करण पूजन पूरे विधि विद्वान से पुरे गांव के लोगो के सामने पूरा कर लेता है जिसके बाद भरत को अपने जैसे कुछ और लोग मिल जाते हैं जिनको सरकार द्वारा मृतक घोषित कर दिया होता है। इसके बाद भरत ने पूरे प्रदेश से अपने जैसे मृतक लोगो को इकठा किया और एक पार्टी “अखिल भारतीय मृतक संग” खड़ी कर ली। दूसरी और भरत के चचेरे भाई भरत के विधायक के विरोधी विधायक जगन पाल सिंह (अमर उपाध्याय) के पास मदद मांगने के लिए जाते हैं और वह उनकी मदद करने को मान जाता है। भरत लाल की कहानी से पत्रकार सोनिआ का दिल तोह जरूर दुखता है पर उसने ठान लिया है के अभ वो भरत लाल की कहानी को देश में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी पहुंचाएगी। इस सभ के विच वकील साधु राम अपनी नई दूकान खोल लेता है और भरत से ही अपनी दुकान का रिवन कटवाता है क्योंकि उसका मानना है के जब से उसने भरत का केस पकड़ा है उसकी वजह से उसके पास और भी लोग आने लग गए हैं।

भरत के घर का गुजारा बहुत ही मुश्किल से चल रहा होता है जिसके कारन भरत अपनी पत्नी को विधवा पेंशन के दफ्तर लेजाता है ता जो उसको विधवा पेंशन मिलना शुरू हो जाये लेकिन वहां के कर्मचारी उसके गले में मंगल सुतार और माथे पर सिन्दूर लगा देख कर पेंशन फॉर्म लेने से मना कर देते है जिसके बाद भरत की पत्नी रोते रोते वहां से सीधे अपने मामा मामी के पास पहुँच जाती है जिन्होंने उसकी पत्नी को पाल पोस के बड़ा किया था। भरत की पत्नी अपने मामा को साथ लेकर भरत के पास वापिस आ जाती है और उसका मामा भरत को कुछ पैसे देने लगता है ता जो वो अपना बैंड बाजे का काम दुबारा से शुरू कर सके लेकिन भरत उन पैसों को लेने से मना कर देता है। पैसों के मना करने के बाद भरत मामा को यह समझाता है के पैसो और धंधे की बात नहीं बल्कि कुछ लोगो ने उसके साथ गलत किया है और उनको बताना है के उन्होंने यह गलत किया है। इस सभ के विच भरत और उसकी पत्नी के विच झगड़ा हो जाता है और उसकी पत्नी अपना समान और अपने बच्चो को लेकर अपने मामा के साथ चली जाती है।

Kaagaz-Full-Movie-Review-in-Hindi-Language-4

कुछ समय बीत जाने के बाद सन 1989 में भरत अपने राज्य में चुनाव लड़ने के लिए खड़े हो जाते हैं और चुनाव चिंन कंकाल (मुर्दा) रख लेते हैं। भरत लाल यह चुनाव जितने के लिए नहीं बल्कि हारने के लिए लड़ रहा था क्योंकि उसकी योयना थी के वो वहां की उच्य न्यायालय में अपील करेगा के अगर वो मृतक है तोह इस इलेक्शन को ख़ारिज किया जाये क्योंकि मरे हुए आदमी को चुनाव के लिए नामांकन स्वीकार कैसे हो सकता है और अगर चुनाव ख़ारिज नहीं करते तोह उसे जिंदा किया जाए। इसके बाद भरत उच्य न्यायालय में अपना केस लड़ता है और वहां के जज की न्यायालय में बेइज्जती कर देता है ता जो उसको पुलिस गिरफ्तार कर ले और उस पर परचा दर्ज हो जाए लेकिन जज उसको गिरफ्तार करने के लिया मना कर देता है क्योंकि जज भी यही चाहता है के कानून में बदलाब होना चाहिए ता जो गरीब लोग इस पीड़ता से मुकत हो सके।

सन 1992 में भरत लाल ने विधायक की मदद से विधानसभा के दर्शक गैलरी का पास बनवाकर एक कांड कर देता है जो उत्तर प्रदेश विधानसभा के इतिहास में आज भी दर्ज है। भरत लाल ने उस विधानसभा में अपने पर्चे फेंक कर अपने आप को जिंदा करने की गुहार लगाई जिसके कारन वहां की पुलिस भरत को बहुत मारती है। यह सभ होने के बाद भरत पूरी तरह से टूट जाता है जिसके बाद वह अपनी पत्नी और बच्चो को वापिस लाने के लिए जाता है लेकिन उसकी पत्नी आने के लिए मना कर देती है क्योंकि वो यह चाहती है के जो लड़ाई उसने शुरू की है उस लड़ाई को उसको पूरा करना चाहिए। जिसके बाद भरत अपने पुरे दल के साथ अपनी शव यात्रा निकालने की तैयारी करता है और तहसीलदार के दफ्तर में पहुँच कर पुलिस को पीछे हटा कर दफ्तर में गुस्स जाते हैं और सभी दल अपने अपने मृतक Kaagaz को ढूंडने लगते है। जिसके बाद भरत को वो फाइल मिल जाती है जिसमे उसका मृतक का Kaagaz होता है लेकिन उसी समय वहां पर पुलिस पहुँच जाती है और भरत को मार पिट कर उससे उस फाइल को छीनने की कोशिश करती हैं लेकिन भरत उस फाइल को नहीं छोड़ता है। दूसरी और साधु राम देश के प्रधान मंत्री से भरत के जीवत होने का प्रमाण पत्र को लेकर वहां पर पहुँच जाता है और भरत को पुलिस से बचा लेता है। जिसके बाद उसकी पत्नी उसको हार पहना कर घर ले जाती है और उसके चाचा चाची भी भरत को उसकी ज़मीन को वापिस करने को कहते है लेकिन भरत उसको लेने के लिए मना कर देता है और उनको माफ़ भी कर देता है। इसके बाद भरत बाकी के बचे मृतक लोगो को सरकारी Kaagaz में जीवत करने के लिए उस दल को चलाने का प्रयास जारी रखता है। यह थी Kaagaz फिल्म की समीक्षा और आप मुझे नीचे कमेंट करके बता सकते हो के आपको मेरी यह Kaagaz फिल्म की समीक्षा कैसी लगी।

2 thoughts on “Kaagaz Full Movie Review in the Hindi Language”

Leave a Reply

%d bloggers like this: