Chhalaang Full Movie Review in Hindi Language

Chhalaang-Full-Movie-Review-in-Hindi-Language

Introduction

Chhalaang फिल्म को ऐमज़ॉन प्राइम वीडियो ने 13 नवंबर 2020 को रिलीज़ किया है। इस फिल्म को आप अपनी पूरी फैमिली के साथ देख सकते हो क्योंकि इसमें कोई भी अश्लील दृश्य नहीं है। Chhalaang फिल्म के निर्देशक है हंसल मेहता और फिल्म के निर्माता है लव रंजन, अजय देवगन, अंकुर गर्ग और भूषण कुमार। इस फिल्म में मुख्य नायक नुशरत भरुचा, राज कुमार राओ, मुहम्मद ज़ीशान अय्यूब, सौरभ शुक्ल, जतिन सरना, सतीश कौशिक और इला अरुण। Chhalaang फिल्म का कुल रनिंग टाइम 2 घंटे 17 मिनट हैं।

Story

Chhalaang फिल्म एक भारतीय कॉमेडी और ड्रामा फिल्म है और फिल्म की कहानी मोंटू नाम के एक पीटी अध्यापक पर सधारित है जिसका अभिनय अभिनेता राज कुमार राओ ने निभाया है और जिस स्कूल में राज कुमार पढ़ाते हैं उस स्कूल के लिए पीटी पढ़ाना सिर्फ एक नौकरी ही है उससे ज्यादा कुछ नहीं है। उसके बाद पीटी अध्यापक ज़ीशान अय्यूब की बदली उस स्कूल में हो जाती है और दोनों अपनी पीटी की नौकरी बचाने के लिए बच्चो को लेकर अपनी अपनी एक एक टीम बनाते है एक खेल प्रतियोगिता खेलने के लिए। इसके बाद प्रतियोगिता कौन जीतता है ये जानने के लिए आपको Chhalaang फिल्म की समीक्षा पूरी पड़नी होगी।

Review

Chhalaang फिल्म की कहानी शुरू होती है शुक्ला (Saurabh Shukla) से जो हर रोज़ की तरह सुबह मोंटू (Raj Kummar Rao) को अपनी स्कूटी पर साथ लेकर स्कूल पहुँचते है। मोंटू का एक छोटा भाई बबलू (Naman Jain) भी होता है जो उसी स्कूल में पढ़ रहा होता है। स्कूल के बाद बबलू को घर जाते हुए एक आदमी थपड मार देता और जब मोंटू को इसके बारे में पता चलता है तोह वह जाकर उनसे मार पीट करने लगता है। जिसके बाद में पता चलता है के बबलू अपनी क्लास की किसी लड़की के साथ जिससे बबलू प्यार करता है उसके साथ एक ही कुल्फी बांट कर खा रहा था और इस लिए लड़की के पिता ने देख कर बबलू को पिट दिया था। जिसके बाद शुक्ला जी उनकी लड़ाई ख़तम करवाने के लिए उनके बिच समझौता करवा देते है। अगले दिन मोंटू अपने संस्कृति दल के कार्यकर्ता के साथ वेलेंटाइन मना रहे लड़को को पार्क से भगाने जाता है और वो दल उन लड़को को मारने लगता है। जिसके बाद मोंटू की निगाह एक आंटी अंकल पर पड़ जाती है और मोंटू उनको पकड़ के उनके साथ एक तस्वीर खींच लेता है अख़बार में देने के लिए। वो आंटी अंकल मोंटू को बताते भी रहते है के हम दोनों पति पत्नी है इसके इलावा वो मोंटू की अपनी बेटी से बात करवाते है, लेकिन मोंटू उनकी एक नहीं सुनता और अगले दिन वो फोटो अख़बार में छप जाती है।

अगले दिन जब मोंटू स्कूल में जाता है तोह वहां पर मोंटू की मुलाकात एक नई कंप्यूटर की अध्यापक नीलिमा (Nushrat bharucha) से होती है। जिसके बाद मोंटो नीलिमा को प्रभावित करने के लिए उसे अपनी अख़बार में छपी फोटो दिखाने लगता है तोह तब नीलिमा बताती है के ये उसके माँ बाप हैं और नीलिमा मोंटू को बहुत बेइज्जत करती है जिसके बाद मोंटू बहुत शर्मिंदा होता है और वहां से चला जाता है। स्कूल को छुट्टी होने के बाद मोंटू नीलिमा से माफ़ी मांगने जाता है लेकिन इस बार फिर नीलिमा मोंटू को बेइज्जत कर के चली जाती है। इसके बाद मोंटू नीलिमा को प्रभावित करने के लिए बहुत से परयास करता है और धीरे धीरे नीलिमा के पास होने लगता है। एक दिन मोंटू फिर नीलिमा से माफ़ी मांगता है और नीलिमा उसको माफ़ कर देती है और मोंटू को शाम को दारु पिलाने को कहती है। रात को दारु पीते पीते उन दोनों में दोस्ती हो जाती है जिसके बाद मोंटू नीलिमा को घर छोड़ देता है। अगले दिन जब मोंटू स्कूल पहुँचता है तोह वह देखता के स्कूल के बच्चो की पीटी की क्लास कोई और अध्यापक ले रहा होता है, जिसके बाद मोंटू प्रिंसिपल के पास जाता है और प्रिंसिपल मोंटू को बताती है के मोहन सिंह (Mohammed Zeeshan Ayyub) को राज्य सरकार की और से यहाँ भेजा गया है क्योंकि आज से स्पोर्ट्स का विषय अनिवार्य होगा और जिस भी स्कूल के बच्चे अच्छा खेलेंगे उसको राज्य सरकार अनुदान देगी और तुम आज से मोहन सिंह के नीचे काम करोगे। मोंटू इस बात से परेशान होकर प्रिंसिपल को नौकरी ना करने की धमकी देकर चला जाता है और एक हफ्ते का समय भी दे जाता है।

मोंटू अगले दिन देखता है के नीलिमा मोहन के साथ घूम रही है और उसका लगता है के मेरा पत्ता अभ गुल्ल होने वाला है। इस लिए मोंटू नीलिमा को चाट खिलाने के बहाने मिलने के लिए बुलाता है और नीलिमा मोंटू को समझाती है के तुम्हारा कोनसा वेतन कम् होने वाला है मोहन के निचे काम करने से इसलिए तुमको ये नौकरी छोड़नी नहीं चाहिए। मोंटू नीलिमा की बात मान जाता है और प्रिंसिपल को जा के कहता है के मुझे मंजूर है मोहन के निचे काम करने के लिए। फिर मोहन कोई भी मौका नहीं छोड़ता मोंटू को निचा दिखाने का और इस के बाद उन दोनों के विच झगड़ा हो जाता है बच्चो को लेकर। जिसके बाद प्रिंसिपल मोंटू को मोहन से माफ़ी मांगने को कहती है लेकिन मोहन अपनी इज्जत बचाने के लिए माफ़ी मांगने से मना कर देता है। फिर मोंटू नीलिमा के घर चला जाता है नीलिमा का हाथ मांगने के लिए लेकिन वहां पर नीलिमा के माँ बाप उसको अपने घर से बाहर जाने के लिए कहते है क्योंकि उनको वो पार्क वाला किस्सा अभी भी याद होता है लेकिन मोंटू नहीं जाता। फिर नीलिमा किसी तरह से अपने माँ बाप को अंदर भेज के मोंटू को समझाने लगती है और उन दोनों के झगड़ा इतना बढ़ जाता है के दोनों एक दूसरे को छोड़ने पर राज़ी हो जाते हैं।

Chhalaang-Full-Movie-Review-in-Hindi-Language-1

उसके बाद मोंटू के दिमाग में एक विचार आता है और मोंटू प्रिंसिपल के पास जाता है और उनको कहता है के मेरे और मोहन के विच में एक प्रतियोगिता करवा दीजिये अपनी अपनी बच्चो की टीम बना कर कोई खेल खेलने की और जो भी यह प्रतियोगिता जीतेगा उसको ये पीटी की नौकरी मिल जाएगी। पर प्रिंसिपल नहीं मानत्ति और फिर शुक्ला उनको समझाता है जिसके बाद प्रिंसिपल मान जाती है। उसके बाद खेल की पर्चियां डाली जाती है जो भी तीन पर्चियां पहले निकलेंगी वो ही खेल करवाया जायेगा और उसमे से पहली पर्ची कब्बडी की दूसरी बास्केटबॉल की और तीसरी 400 मीटर की दौड़ की निकलती है। इसके बाद मोंटू और मोहन को एक महीने का समय दे दिया जाता है तैयारी करने के लिए। मोहन सभी अच्छे अच्छे खिलाडी अपनी टीम में लेता है जिसके बाद मोंटू के पास सभी ऐसे खिलाडी बचते है जिनका खेल कूद में बिलकुल भी मन नहीं होता। जिसके बाद मोंटू मोहन की टीम से कुछ बच्चो को मोहन के खिलाफ भड़का देता है उसकी टीम में ना खेलने के लिए और फिर उनको प्रिंसिपल के पास ले जाता है उनकी टीम बदली करवाने के लिए लेकिन वहां पर पहले से नीलिमा बैठी होती है और उसको प्रभावित करने के लिए मोंटू उन बच्चो को समझा कर मोहन की ही टीम में खेलने के लिए वापिस भेज देता है। मोंटू की टीम थोड़ी कमजोर होती है भागने में इसलिए वो अपनी टीम को एक अमरुद के बाग़ में ले जाता है अमरुद तोड़ कर खाने के लिए। बच्चो को बाग़ में दाखिल करने के बाद मोंटू बाग़ के मालिक को फ़ोन कर देता है के आपके बाग़ में कुछ बच्चे आपके अमरुद तोड़ रहे हैं जिसके बाद बाग़ का मालिक अपने कुत्तों को उनके पीछे छोड़ देता है। जैसे ही बच्चे कुत्तों को देखते है वो सभी तेज़ी से बाग़ से बाहर भागने लगते है मोंटू के पास और किसी तरह से सभी बच जाते है उन कुत्तों से।

ऐसे और कई तरकीबे लगाकर मोंटू अपनी टीम को तैयार कर लेता है प्रतियोगिता के लिए लेकिन एक महीना पूरा होने के दो दिन पहले बच्चो के माँ बाप को पता लग जाता है के उनके बच्चो को स्कूल में पढ़ाया नहीं जाता बल्कि उनको सारा दिन प्रतियोगिता की तैयारी के लिए खेलाया जाता है। वो सभी प्रिंसिपल को ये प्रतियोगिता बंद करने को कहते नहीं तोह वो सभी अपने अपने बच्चो को किसी दूसरे स्कूल में दाखिला दिलवा देंगे और जिसके बाद प्रिंसिपल प्रतियोगिता बंद करवा देती है। उसके बाद नीलिमा मोंटू की मदद करती है बच्चो को वापिस खेल में भाग लेने के लिए जिसके लिए वो एक एक बच्चे के घर जा के उनके माँ बाप को तरह तरह के डरावे देकर वापिस खेलने के लिए मना लेती है। एक बार फिर सभी बच्चे खेल के मैदान में पहुँच जाते हैं प्रतियोगिता के लिए जिसके बाद पहली बास्केटबॉल की प्रतियोगिता मोहन की टीम जीत जाती है।

उसके बाद दूसरी प्रतियोगिता 400 मीटर की दौड़ की होती है और मोंटू अपनी टीम को जितवाने के लिए स्पीकर में कुत्तों की अव्वाज़ जोर से छोड़ देता जिसकी वजह से मोंटू की टीम के बच्चे कुत्ते से डर के तेज़ भागने लगते है और दौड़ की प्रतियोगिता मोंटू की टीम जीत जाती है। अगले दिन तीसरी और आखरी प्रतियोगिता कब्बडी की होती है जो बहुत मेहनत से मोंटू की टीम जाती है। आखिर में प्रतियोगिता के हकदार मोंटू की टीम वाले बन जाते हैं, मोंटू और मोहन एक दूसरे को लोगो के विच स्पीकर पर सम्बोदित करते हैं और एक दूसरे का धन्यवाद करते है। जिसके बाद मोंटू सभी के सामने मोहन के नीचे ही काम करते रहने को कहता है जिससे उसको और बहुत कुछ सिखने को मिलेगा। इस तरह मोंटू नीलिमा का दिल भी जीत लेता है और यहाँ पर फिल्म की कहानी ख़तम हो जाती है। ये थी Chhalaang फिल्म की समीक्षा और आप मुझे नीचे कमेंट कर के बता सकते हो के आपको मेरी Chhalaang फिल्म की समीक्षा कैसी लगी।

2 thoughts on “Chhalaang Full Movie Review in Hindi Language”

Leave a Reply

%d bloggers like this: